वेदना

मेरी तनहा सी रातों में हज़ारों गम के साये में कुछ लगते हैं अपने से तो कुछ लगते पराये से मुझे भी दिल के इस फन पे बहुत ही नाज़ होता है जहाँ भर के थपेड़ों को ये जैसे छुपाये है हमारी डूबी आँखों में ना अश्कों का सुराग होगा कहाँ गैरों में ये दम था हम अपनों के सताये हैं किसी दिन खाक के मानिन्द फ़ना होंगे हवाओं में अभी तो लाश हम अपनी यूँ मुश्किल से उठाये हैं संकेत मुरारका Advertisements

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बीते पल

बीते पल यादो के झुरमुट से कोई पत्ता, आया उड़ते हुवे ; उस पर कुछ धुल जमी थी, मन है कि मचल पड़ा, पुरानी स्मृतिया, आतुर आँख देखे बरसे न जाने कैसी कैसी यादें घुमे नज़र मे दिन पुराने, एक दुसरे का साथ निभाना, जीने-मरने की कसम, घर बसाने का सपना, जानना चाहता हूं कि- बिछड़ने के बाद, क्या था जो जोड़े रखा हमे, मन आज भी तड़पता, अकेले होकर कभी कभी, सब के बीच तलाश करता, पुराने दिन कि – अटखेलियाँ करती नादानीयां रिमझिम बारिस मे भीगना, कानो मे गुनगुनाये पैजनीया, खिलखिलाना,हँसना-हंसाना, और कितनी कितनी बातें, लिपट पड़ती बांहों Continue reading बीते पल

गम के साये में

गम के साये में मेरी तनहा सी रातों में हज़ारों गम के साये में कुछ लगते हैं अपने से तो कुछ लगते पराये से मुझे भी दिल के इस फन पे बहुत ही नाज़ होता है जहाँ भर के थपेड़ों को ये जैसे छुपाये है हमारी डूबी आँखों में ना अश्कों का सुराग होगा कहाँ गैरों में ये दम था हम अपनों के सताये हैं किसी दिन खाक के मानिन्द फ़ना होंगे हवाओं में अभी तो लाश हम अपनी यूँ मुश्किल से उठाये हैं संकेत मुरारका

बेवफ़ा

बेवफ़ा ना बारिस है न बहार है पर ख़िज़ाँ तो है रूठी मौसम सी बेवजह बेवफ़ा तो है जिस रास्ते में तेरे लिए बिछाए थे फूल उस रास्ते पर फाँक रहे धूल ख़फ़ा तो है चाहत बना ना पाए तेरे दिल में अज़ीज़ लेकिन दिल में इतंजार का हौसला तो है हर रात तिरी गली में गुजरे ग़र हाँ कहे मन्जिल इक है पर अभी भी फ़ासला तो है खुदा तुझे बख्शे तिरी बेवफ़ाई के लिए तुझे भूलाने ग़म को कंही लगाना तो है कहते हैं सब के ख़िज़ाँ में पत्ते झर जाते फिर भी बहार का आने का वादा Continue reading बेवफ़ा

आँसु

आँसु उदासी में दिल को आँसु से राहत कहां मिले जुगनुओं से रोशन रात को रौशनी ना मिले आंखों से बरस पीड़ा का सैलाब उमड़ पड़े जज़्बातों को मिटा दे वो हमदर्द कहां मिले रखता दिल में महफूज़ अपने अरमान सारे कोई हमसफ़र या हमदर्द जब मुझे ना मिले हर वक़्त सभी बदगुमानी दिल पे भारी पड़े अब दर्द नहीं होता मुझे जब खूशी ना मिले आँसू को कितना समझाया बेवक्त ना झरे सजन सभी एहसासों का कभी जवाब ना मिले सजन

माँ का पुत्र विछोह

माँ का पुत्र विछोह रुकी हुई सांसें उसकी फिर से कब चल पड़ी पता नहीं? जीर्ण हो चुकी थी वो जर्जर सी काया, झुर्रियाँ की कतारें उभर आईं थी चेहरे पर, एकटक ताकती कहीं वो पथराई सी आँखें, संग्याहीन हो चुकी थी उसकी संवेदनाएँ, साँसों के ज्वार अब थमने से लगे थे उसके, जम सी रही थी रक्त धमनियों मे रुककर। ऐसा हो भी तो क्युँ न………….! नन्हा सा पुत्र बिछड़ चुका था गोद से उस माता की! सहन कहाँ कर पाई विछोह अपने पुत्र की, विछोह की पीड़ा हृदय मे जलती रही ज्वाला सी, इंतजार में उसके बस खुली Continue reading माँ का पुत्र विछोह

वो बेपरवाह

वो बेपरवाह, सासों की लय जुड़ी है जिन संग, गुजरती है उनकी यादें, हर पल आती जाती इन सासों के संग। वो बेपरवाह, बस छूकर निकल जाते है वो, हृदय की बेजार तारों को, समझा है कब उसने हृदय की धड़कनो को। वो बेपरवाह, अपनी ही धुन मे रहता है बस वो, परवाह नही तनिक भर उसको, पर कहते है वो प्यार तुम्ही से है मुझको। वो बेपरवाह, हृदय की जर्जर तारो से खेले वो, मन की अनसूनी कर दे वो, भावनाओं के कोमल धागों को छेड़े वो। वो बेपरवाह, टूट टूट कर बिखरा है अब ये मन, बेपरवाह वो Continue reading वो बेपरवाह

कितना जिया हूँ

कितना जिया हूँ कुछ तो था जिसके इंतज़ार में इतना जिया हूँ, वरना तू ही सोच तेरे बाद भी कितना जिया हूँ। तेरी महोब्बत को अपनी जिंदगी कहता था न, शायद बेवफा हो गया मैं भी जो तेरे बिना इतना जिया हूँ।।1।। खुदगर्ज कह दे तू मुझे मैं बुरा नही मानता, पर सच कहूँ आज भी अपने हक़ में कोई दुआ नही मांगता। मौत तो रोज आती है मुझे संग ले जाने को, मैं तेरे लौट आने का बहाना दे देकर जिया हूँ।।2।। हर रात बिस्तर पर आँखे भिगो कर सोता था, कोई जान न ले आँसुओ की वजह मैं Continue reading कितना जिया हूँ

बेटी की विदा

बेटी की विदा आज विदा हो रही है फिर किसी माँ की प्यारी बेटी, आँचल में मुंह छिपा रो रही बेटी । आंसुओं संग थपथपा कर सीख दे रही माँ , ये घर बेगाना  हुआ तेरे लिए आज से मेरी बेटी । हुए हैं दो परिवार आज से एक मगर, नहीं हुए हैं दो घर अभी एक,ये जान लेना मेरी बेटी , दिलों के ग़मों को आंसूंओं में बहा देना , पर नहीं लाना दिल की उदासी चेहरे पर मेरी बेटी । बदल जायेगी  तेरे हर रिश्ते की तस्वीर , किसी की बहु  किसी की हुई आज से भाभी , हुए घर Continue reading बेटी की विदा

तुम दीप जलाने ना आई

तुम दीप जलाने ना आई, प्राणों का आधार ना मिल पाया! हृदय अरकंचन के पत्तों सा, जज्बात बूँदों सा बह आया! प्रज्जवलित सदियों से एक दीप ह्रदय में, जलता बुझ-बुझ कर साँसों की लौ मेंं, नीर हृदय के लेकर जल उठता धू-धू कर मन में, सूखे हैं अब वो नीर बुझ रहा दीप इस हिय में । तूम आ जाते जल उठता असंख्य दीप जीवन में, तुम दीप जलाने ना आई, प्राणों का आधार ना मिल पाया। निर्झर नीर जज्बातों का बह रहा चिर निरंतर, रुकता है ये कब अरकंचन के पत्तों पर, अधूरी प्यास हृदय की प्यासी सागर के Continue reading तुम दीप जलाने ना आई

वो कुछ कहती हम कुछ समझते थे

वो दौर महोब्बत का भी गजब का था, मिलन को वो भी तड़पते हम भी खूब तरसते थे। जब मिलते तो ढेरों बातें होती थी, फर्क बस ये था हम कुछ कहते वो कुछ समझती थी, वो कुछ कहती हम कुछ समझते थे।।1।। वो सौ सवाल ले कर आती थी, जिसके जवाब हम टाल जाते थे। बस उसकी तारीफ में ग़जलें गा-गा कर, उसे थोडा बहलाते थे।। हम चाँद कहते उसे, वो चाँद से शिकायत करने लग जाती थी। कहती मुझे छोड़ तुम उस चाँद की बाते करते हो, पगली अपनी तारीफ भी कहाँ समझ पाती थी।। उसकी इसी मासूमियत पर तो हम मरते थे, हम कुछ कहते वो कुछ समझती थी, वो कुछ कहती हम कुछ समझते थे।।2।। प्यार से उसको जब गले से लगाता था, बाँहों में भरते ही दुनिया को भूल जाता था। पहले सताता उसे थोडा रुलाता उसे, फिर मनाने के बहाने से करीब जाता था।। समझती वो भी सब थी फिर भी अंजान बनी रहती थी, मेरे करीब आते ही मुंह फेर कर मुस्कुराती थी। प्यार दिल में छुपाए बाँवरी बातें खूब बनाती थी, पर जब प्यार की बात आ जाए, चेहरा आँचल में छुपाए शर्माती थी।। अब वो साथ नही बस उसकी यादें है, अब वो प्यार वाली पूर्णिमा कहाँ, बस तन्हा काली राते है। लोगो से सुना है मैंने की वो बेवफा हो गई, पर लगता है की ये लोगो की मनगढ़ंत बातें है।। उन प्यार भरे पलों को जीने को तो हम आज भी तरसते है, हम कुछ कहते वो कुछ समझती थी, वो कुछ कहती हम कुछ समझते थे।।3।। ***नि-3***

रज रेणुका यादों की

रज रेणुका यादों की रज रेणुका असंख्य तेरी यादों के, दैवात बिखर आभूषित इस मन पे, धुल रही रेणुकाएँ प्रभा तुषार तुहिन में, भीग रही वल्लिका बेलरी शबनम में। लघु लतिका सी यादों के ये पल, लतराई दीर्घ वल्लिकाओं सी इस मन पर, ज्युँ कुसुमाकर की आहट ग्रीष्म ऋतु पर, प्रभामय दिव्यांश मेरी प्रत्युष वेला में। अति कमनीय मंजुल रम्य वो यादें, तृष्णा पिपास नूतन अभिनव सी, मौन तोड़ बहती तन मे शोनित रुधिर सी, द्युति सी ये यादें मोद प्रारब्ध जीवन में। अलौकिक शुचि वल्लिकाओं सी यादें, मधुऋतु विटप सी आवरित जीवन में, आख्यायिका कहती ये तेरी गठबंधन के, Continue reading रज रेणुका यादों की

अब उम्मीद छूटती जाती है

अब उम्मीद छूटती जाती है बरसो बीते इंतज़ार में, अब आस छूटती जाती है। खुद को समझाता, हिम्मत बंधाता, आस की नोका लिये जब किनारे तक आता हूँ, उम्मीद फिर डूबती जाती है। तुम तो बता कर गए थे फिर लौट कर ना आओगे, मैं बांवरा चमत्कार की उम्मीद में हु की तुम आओगे। सुबह की रौशनी जब फीकी पड जाती है, साँझ और साँझ से फिर रात हो जाती है। तुम नही आते मेरी आस फिर छूटती जाती है। एक तस्वीर है तुम्हारी हर रात सिरहाने रख कर सोता हु, कोई है ही नही जिससे अपना हाल सुनाऊ, मै Continue reading अब उम्मीद छूटती जाती है

अकेलापन और एकांत

अकेलापन और एकांत अकेलापन,एक अंजानी सी प्यास है, जो मिल नहीं सकता, उसे पाने की आस है। किसी यायावर की भटकी यात्रा है, और केवल,बिंदु या मात्रा है। जबकि, एकांत,है, अंतस की खोज, आराधना है। जीवन का मर्म है, निशब्द साधना है।

तनहाई उनसे कहना

तनहाई उनसे कहना, मेरा प्यार … वो अनकहे शब्द, शायद जो कह न पाया मै, और वो समझ भी न पायी..जो अब दर्द बनकर चुभते है ॥ तनहाई उनसे कहना उनकी मुस्कुराहटों के पल आज भी थामते है मेरे उदासी के दर्द को॥ तनहाई उनसे कहना उनकी बेरुखी ने मुझे बहुत दुखाया है ॥ तनहाई उनसे कहना हर बार सोचता हू उनको न देखू पर न जाने ऐसा क्या है उनके चेहरे मे कि जब भी मूँदता हु आखे उनको देखे बिना रह न पता हूँ ॥ तनहाई उनसे कहना,, मै आज भी वही हु जहा वो मुह मोड़ कर Continue reading तनहाई उनसे कहना