शेरों -शायरी -१२

राजनैतिक नागपाश, श्रम दिवस का अवकाश जुलूस नारेबाजी,मजदूर की मजबूरी का उपहास सजन Advertisements

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मरहले 2

जब दर्द उठता है तेरी यादो का इस दिल में, मैं खोल देता हूँ. जब ना बिकते हैं आंसू गम के बाजार में, मैं मोल देता हूँ. जब से तू रुखसत हुआ क्या बीता है मेरे साथ, पूछ लेना तस्वीर से अपनी,उससे सब कुछ, मैं बोल देता हूँ. श्रेयस अपूर्व”मगरिब” भोपाल