शायरी-११

आसान थे जो रास्ते, दूसरों की नज़रो में, पार करने वालों से पूछिए, कितनी मेहनत लगती हैं, इस छोर से, उस पार उतरने में ॥ ‘विराज’ Advertisements

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मरहले 2

जब दर्द उठता है तेरी यादो का इस दिल में, मैं खोल देता हूँ. जब ना बिकते हैं आंसू गम के बाजार में, मैं मोल देता हूँ. जब से तू रुखसत हुआ क्या बीता है मेरे साथ, पूछ लेना तस्वीर से अपनी,उससे सब कुछ, मैं बोल देता हूँ. श्रेयस अपूर्व”मगरिब” भोपाल

शायरी-१०

आईने से पूछो, कि, हम किससे प्यार करते है, ता-उम्र बिताने का, उसी से दम भरते है, जो तस्वीर उतर, आएगी सामने, समझ लेना हम, उसी से प्यार करते है ॥ ‘विराज’