बूढ़ी माँ

बूढ़ी माँ वो आँखे किसी का दीदार करने के लिए तरस रही थी।उस बूढ़ी औरत के चेहरे पर बनी झुर्रियां इस बात का संकेत कर रही थी कि उस पर बुढ़ापा हावी होते जा रहा था।अचानक एक घंटी बजती हैं और वो इस बात का संकेत कर रही थी की किसीने दरवाजे पे बहुत दिनों बाद दस्तक दी थी ।वह बूढी औरत भगवान् का नाम स्मरण करते हुए’हाय राम’ कौन हैं?कहते हुए दरवाजे की तरफ अपने दबे पैरों से बढ़ती हैं और कोमल डाली जैसे हाथों से दरवाज़े की कुंठी खोलने का प्रयास करती हैं।जैसे ही वह दरवाजा खोलती हैं Continue reading बूढ़ी माँ

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Love Story – अवनि और आकाश

Love Story – अवनि और आकाश अवनि और आकाश स्कूल मे साथ मे पढ़ते थे; आकाश, अवनि को बहुत प्यार करता था और अभी भी शायद उतना ही करता हे| अवनि भी आकाश को प्यार करती थी पर अवनि अपने पापा के डर के कारण आगे नही बढ़ी| बस उनका प्यार शायद यही था, शायद सच्चा प्यार हमेशा अधूरा रहता हे| आकाश को बस एक ही बात का अफ़सोस था की वह अवनि को अपनी दिल की बात न बता पाया , पर इस जीवन मे लगभग यह अब असंभव हे, वो जब कभी भी भगवान से प्रार्थना करता था Continue reading Love Story – अवनि और आकाश

भीड़ का हिस्सा ( लघु कथा )

भीड़ का हिस्सा मुंबई का बोरीवली रेल्वे स्टेशन , सुबह 9 बजे का समय , भीड़ का रेला बहा जा रहा है । जहा देंखो दूर दूर तक इंसानी मुंडिया ही नजर आ रही है , ऐसा लग रहा है जैसे कोई समुद्र बह रहा है और उसमे पानी की जगह इन्सान हो ! ‘ओह इंसानों का समुद्र ! ‘ मनोहर बुदबुदाया और लोकल के डिब्बे से उतर कर उस भीड़ का हिस्सा हो गया । कोहनियो से कोहनिया टकराते हुए लोग आगे बढ़ रहे थे , मनोहर को थोडा सुकून हुआ भीड़ का हिस्सा बन कर , उस लोगो Continue reading भीड़ का हिस्सा ( लघु कथा )

टूटा चश्मा

मैं ड्यूटी के लिए लेट हो रहा था। इसलिए ऑटो पकडने के लिए मैं तेजी से चल रहा था। अभी मैं गली से होते हुए सडक पर आ गया  था कि मैंने देखा मेरे आगे-आगे एक अंकल जी जा रहे थे। जैसे ही मैं अंकल जी से आगे निकला तो पीछे से एक आवाज आई, बेटा रुक जाओ… मैंने पीछे मुडकर देखा तो वही अंकल जी मुझे आवाज दे रहे थे। मैं वहीं पर रुक गया। अंकल जी ने कहा बेटा कुछ पैसे दे दो। थडी देर के लिए मैं आश्चर्यचकित सा हो गया और मैंने सोचा अंकल जी देखने Continue reading टूटा चश्मा

उपन्यास

घोड़े पर सवार वीरसेन आगे बढ़ रहा था , जंगल के पेड़ो के मध्य बनी सड़क जो बैलगाडियों के आने-जाने से बनी थी पर वीरसेन का घोडा सरपट भाग रहा था , चांदनी रात में पेडो की लम्बी छायाए अजीब से माहोल का आभास दे रही थी ऊपर से झींगुरो की आवाज व कुत्तो के भोकने की आवाज ने माहोल को काफी डरावना बना दिया था और इस माहोल में दूर कही सियार की आवाज आये तो किसी बहादुर व्यक्ति के शरीर में भी डर की झुरझुरी आ जाये तो आश्चर्य की बात नहीं , परन्तु ऐसे माहोल में भी Continue reading उपन्यास