“जाने क्यों”

जाने क्यों वो कुछ कहते नहीं हैं। जो है लबो पे वो रखते नहीं हैं। ना ना कहते जो दूर हैं मुझसे, पास ही रहो जाने क्यों ये कहते नहीं हैं। हर दिल टूटा है यहाँ गम के भंवर में, हर दर्द साथ ही क्यों वो सहते नहीं हैं। गुलाब , चन्दन , महावर अब भाते हैं उन्हें, जाने क्यों वो मेरे ही गीतों से सजते नही हैं। वो कह के गए थे इस दिल को अमानत अपनी, जाने क्यों वो ही इस दिल में अब रहते नहीं हैं। कल तो जो बहता दरिया था इश्क का “मैकश”, आज वो Continue reading “जाने क्यों”

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