चाँद बना कर

बहुत कर ली ये शैतानी, लो अब मासूम हो जाते है
समन्दर की ऱवानी के, दरम्यांगुम हो जाते है
जमीं के एक हिस्से को फलक का चाँद बना कर के
जमाने से कहीं ओझल, चलो हम-तुम हो जाते है

About Satyendra Govind

I always try to write the voice of my heart.