लिखता हूँ उसका होकर

दिल के टूटन की बात सुनो,वो खुश तो हैं तनहा होकर,
मिलते हैं जो मुस्का कर वो,कुछ हँस कर कुछ रो कर।

यहाँ नींद भी आती है तो,सपनो में आ जाते हैं वो,
यही तो हमने पाया है अब,प्यार में उनके खुद खोकर।

चन्द कमाई मेरे दिल की,जो अब शायद आज लुटाता हूँ,
वाह कमाता हूँ हरदम,जब लिखता हूँ उसका होकर।

बाजारों में मोल नहीं अब,कल महफ़िल में ये पाया हमने,
खरीद हमें वो ले जाए और,मिट जाएँ हम खुद बिककर।

एक यही आस है आज हमारी,वो सोया करेंगे चांदनी में,
चाँद निहारेगा वहाँ दूर से,और देखेंगे हम पास में सोकर।

अब ना है मदीने की चाहत,ना ख्वाब हैं हिजरत के बस,
वो जन्नत बन जायेगी,जहाँ ले चलेंगे वो हाथ थामकर।

किस्मत को कैसे देखूँ लकीरों में,हाथ उन्होंने पकडे है,
तदबीर बदल देते हैं बस वो, माथे पे यूं हाथ फिराकर।

कल उर्दू में नज्म लिखी,कविता हुई तो हिंदी में जैसे,
हिंदी में प्रेमी वो कहते “मैकश”,उर्दू में कह देते शायर।

“मैकश”

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