मेरा प्यार हो तुम


मेरा  प्यार हो तुम

पगली मेरा प्यार हो तुम,

सच पगली मै कैसे बताऊ..

मन के मेरे आस हो तुम ।।

 

जुड़ी तुमसे मेरी सब यादे है

रिस्ता मेरी जान हो तुम …

 

भूल कोई ना दोष तुम्हारा ..

कब तुमने मुझको चाहा था॥

मुझसे तो था बस मन बहलाना

मैंने ही अरमान सजाया था

 

वो भी अच्छा, तुम भी अच्छी

मै ही तो एक पागल था॥

मेरा दोष यही पगली तुझको

अपना मैंने माना था ॥

 

सच कहती हो रिस्ता क्या है ?

भूल गयी जब वादे तुम ..पर

तुमसे जुड़ी मेरी सब यादे है

यू तो मेरा  प्यार हो तुम ॥

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