अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

महिला दिवस महिला की हर जगह दिख रही, है समान भागीदारी । जिसकी शक्ति का लोहा। मान चुकी है दुनिया सारी। क्यों कहता नारी पीछे है। नही रही अब अबला बेचारी। कंधा मिलाकर चल पडी है प्रगतिशील है आज की नारी। आधी दुनिया जिसके बल पर जिससे बनती सृष्टि हमारी। ममता की मूरति है कामिनी भामिनी दारा आदि नामधारी। एक नहीं दो दो मात्राएं। नर से भारी नारी । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र 9198989831

नेता

मन कहता नेता बन जाऊ। पहनू लम्बा कुर्ता टोपी जोर जोर से मैं चिल्लाऊ। मन कहता नेता बन जाऊँ कोई नहीं पूछेगा पढाई टैक्स नहीं जो होगी कमाई बी आई पी की कुर्सी पाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । कोई कानून न आडे आये जो आये संशोधन करवाये बिना पूँजी धन थोक कमाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । झूठ बोलना सीख ही लूँगा । हर काम में कमीशन लूँगा जिसको तिसको धाक जमाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । वादा मेरा अस्त्र बनेगा झूठ मेरा धर्म बनेगा दाग रहे पर बेदाग दिखाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । Continue reading नेता

ग़ज़ल (एक ख्याल)

गफलत में था कि तू, फ़क़त मेरी दुलारी है, किस्मत पलटी उसकी, जिसकी तू दुलारी है। महताब खोया-खोया सा, रहता है आजकल, उसकी आँखों ने तस्वीर, तेरी जो उतारी है। गुजरे हैं कई पल, अपनी ही साँसों के बगैर, याद आती नहीं कोई रात, बिन तेरे गुजारी है। खेला था जुआ कभी, तुझे हासिल कैसे करूँ, तुझसे ज़्यादा कौन जाने, ये दिल तो जुवारी है। तारों की बारात निकली, कहकशां के रास्ते, चांदनी की चादर लपेटे, रात अभी कुंवारी है। बहकते हैं कदम, गुजरता हूँ जब तेरी गली से, नशा शराब का नहीं, तेरी आखों की खुमारी है। तू बेशक Continue reading ग़ज़ल (एक ख्याल)

कान्हा संग खेलू आज होली (होली विशेषांक)

आयी बृज में रंगबिरंगी होली रे केसरिया रंग रंगी मोरी चोली रे गुलाल उड़ावे कान्हा की टोली रे आज धरती अंबर सब भयो है लाल आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल हाथ जोड़ पडूँ तोरी पावन पैंया चल हट छोड़ मोरी नाजुक बैंया मोहे रंग दे आज मोरे भोले सैंया आज धरती अंबर सब भयो है लाल आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल कान्हा अब तो दिखा दे झलक तुझ बिन कैसे झपकाऊँ पलक अल्हड यौवन मोरा जाये छलक  आज धरती अंबर सब भयो है लाल आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल मादक फागुन भी होरी रंग में चहके फ़ाग गावत Continue reading कान्हा संग खेलू आज होली (होली विशेषांक)

श्याम रंग दे आज मोहे केसरिया

श्याम रंग दे आज मोहे केसरिया श्याम रंग दे आज मोहे केसरिया, तेरे श्याम रंग में हुई मैं बावरिया, गोपियों का तू चित चोर सांवरिया, क्यों खींचे तू मोरी धानी चुनरिया। गोपी संग कान्हा नाचे ता-ता थैय्या, बृज में होरी खेलत कृष्ण कन्हैय्या। कान्हा तोरे बिन सुनी है ये अंगना, तोरी राह ताके झनके मोरी कंगना, तोरे लिए बृज बाला को है सजना, भिगो दे चुनरी मान मोरा कहना। गोपी संग कान्हा नाचे ता-ता थैय्या, बृज में होरी खेलत कृष्ण कन्हैय्या। मेघा भी है बरसे आज श्याम रंग में, फाल्गुन भी झूमे होरी की उमंग में, बृज नगरी डुबो है भांग Continue reading श्याम रंग दे आज मोहे केसरिया

होली खुशियों की झोली

आयी बसंत की होली मीठी लगती है बोली रंग सराबोर है वन मे लाल सुनहरी पीली फाग का रंग चढा है सब निकल पडी है टोली प्रिय प्रियतम को रंग डाले सब भीज गयी है चोली फागुन के गीत सुनाए मीठी लगती है बोली कोई गुझिया पूडी खाये कोई भंग सो रंग जमाए कोई पकड के रंग लगाए कोई करता हंसी ठिठोली अबीर गुलाल लगे है सुन्दर लगती है टोली। ढोल के थाप लगे है सब रंग खेले हमजोली। भूल गये सब शिकवे खुशियां लाती है होली। रंग उडे नभ तक है उड रही अबीर और रोली। होली की शुभकामनाएं Continue reading होली खुशियों की झोली

प्रेमरंग की होली

प्रेमरंग की होली शीत ऋतु की हुई विदाई। ग्रीष्म ऋतु में आई होली।। खिले टेसू के फूल प्यारे। केसरिया ये प्यारे -प्यारे।। परीक्षा भी नजदीक आई। करो जमकर तुम पढ़ाई।। दादा से पिचकारी मंगाई। दादी अबीर भर के लाई।। किशन ने डफली बजाई। फाग गीतों की बारी आई।। लाल हरा पीला नीला ये। रंग भर भर गुलाल उड़ाई।। जलेबी और नमकीन की। घर घर खुशबू आई भाई।। मंजीरे भी खूब बजाती। फ़ाग खेलने आई टोली।। हंसी खुशी और ठिठोली। लेकर भाईचारा आई होली।। पिचकारी और गुब्बारों में। भर भर रंग और खेले होली।। असत्य की होली जलाओ। फिर खेलो प्रेमरंग Continue reading प्रेमरंग की होली

हाथ तेरा थाम लेंगे (ग़ज़ल )

तू हाथ बढ़ाकर तो देख, हाथ तेरा थाम लेंगे, अजनबी हो कर भी हम, हाथ तेरा थाम लेंगे। भूल जाये अगर फ़र्ज़ तू, हाथ अपना छुड़ा कर, मगर हम यारों के यार हैं, हाथ तेरा थाम लेंगे। ख़ुदा को आजमाया, आजमाया तक़दीर को भी, आजमा कभी इस यार को, हाथ तेरा थाम लेंगे। गिर्दाब में फंस जाये जब, कस्ती मेरे यार की, इशारा बस एक कर देना, हाथ तेरा थाम लेंगे। इज़्तिराब हो दिल में कभी, ज़िन्दगी के सफर में, तेरे साँसों की डोर थामकर, हाथ तेरा थाम लेंगे। ये लम्हे ये तन्हाईयाँ भी, छोड़ देंगे साथ तेरा, हम बनकर Continue reading हाथ तेरा थाम लेंगे (ग़ज़ल )

गुफ़्तगू हो गई ख्वाब से

सजी महफ़िल ख़्वाबों की, चांदनी रात के आँचल तले। इसी आँचल ने पाला इनको, इसकी छाँव में ही पले। संगीत की मादकता में, उधर ख्वाब थिरक रहे थे। आबशार बनकर बा-दस्तूर, इधर पैमाने छलक रहे थे। ख़ामोशी थी चिर निद्रा में, मदहोशी का था आलम। कोई किसी की प्रियतमा, कोई किसी का था बालम। थिरक रहा था मैं भी, पकड़ कर हाथ में प्याला। ख़्वाबों में भी ना देखी, ऐसी उन्मत्त मधुशाला। पूछा मैंने एक ख्वाब से, क्या देखा है कभी ख्वाब? मुस्कुराकर उसने दिया, मेरे कौतुक प्रश्न का ज़वाब। देखते नहीं हम ख्वाब कभी, ख्वाब दिखाते हैं इंसानों को। Continue reading गुफ़्तगू हो गई ख्वाब से

गिरने का जमाना है आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । समझता था ऊपर चढे वो है गिरते मगर जो है नीचे वही गिर रहे हैं । क्या बात है सच का साथी रहा जो वही घिर रहा है सही घिर रहा है । गिराने की ख्वाहिश रही दिल में जिसके मुझे तो गिराने में खुद गिर रहे है । गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । कहीं पर चढ़ा भाव आलू के देखो कहीं प्याज उछली नभ छू रही है । मगर यह भी देखा भाव भारी Continue reading गिरने का जमाना है आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । समझता था ऊपर चढे वो है गिरते मगर जो है नीचे वही गिर रहे हैं । क्या बात है सच का साथी रहा जो वही घिर रहा है सही घिर रहा है । गिराने की ख्वाहिश रही दिल में जिसके मुझे तो गिराने में खुद गिर रहे है । गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । कहीं पर चढ़ा भाव आलू के देखो कहीं प्याज उछली नभ छू रही है । मगर यह भी देखा भाव भारी Continue reading गिरने का देखो जमाना हि आया।

चाँद सितारों से रात सजा रखी है

चाँद सितारों से रात सजा रखी है चाँद सितारों से रात सजा रखी है जमीं पे मखमली दूब सजा रखी है। बता, ये दुनिया क्यूँकर सजा रखी है वो बोला, तेरे लिये सजा रखी है। … भूपेन्द्र कुमार दवे

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है    तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है भ्रमरों की मस्त महफिल बुला रखी है पर तुमने मुझे तन्हा रहने न दिया कुछ याद अपनी मेरे लिये सजा रखी है।                                  … भूपेन्द्र कुमार दवे               00000

शब्द ताकत है शब्द दुआ है

*शब्द ताकत है शब्द दुआ है *शब्द घातक है शब्द दवा है *शब्द वेद है शब्द कुरान है *शब्द बाइबिल शब्द पुरान है शब्द अल्लाह शब्द भगवान है शब्द उपदेश शब्द गीत गान है शब्द मे समाहित आस्था महान है शब्द मंत्र शब्द फरमान है शब्द पूजा है शब्द अजान है शब्द बडाई है शब्द सम्मान है शब्द गीत है शब्द तान है शब्द ही अंधे का भान है शब्द अधिगम की जान है शब्द से होता मानव की पहचान है सबको इसका संज्ञान है। शब्द शक्ति है शब्द ही ज्ञान है शब्द कवि लेखक का प्रान है। शब्द से Continue reading शब्द ताकत है शब्द दुआ है

कवि के अमर शब्द

रात का अँधेरा, पसरा हुआ सन्नाटा जंगल के सभी प्राणी निःशब्द अँधेरे सन्नाटे में कोई घायल परछाई भागी जा रही है किसी अज्ञात दिशा की ओर हाथों में कुछ पन्नों के टुकड़े, माथे से बहता लहू शायद यह घायल परछाई किसी कवि की है ढूंढ रहा है जो एक सुरक्षित कोना, अपनी कविता की आत्मा को जिन्दा रखने के लिए दिखाई देती है तभी उसे एक निर्जन व वीरान गुफा गुफा भी उसकी दशा देख, देती है उसे शरण तभी कुछ धुंधली परछाइयाँ, हाथों में मशाल थामे ढूंढ रही हैं उसे, कुछ हाथों में नुकीले पत्थर हैं तो कुछ हाथों Continue reading कवि के अमर शब्द