रिश्तों की क़द्र

रिश्तों की क़द्र

अपने रिश्तों की कद्र करें….
अक्सर गुस्से में, जल्दबाज़ी में नई उम्र में,
हम ऐसी गलती कर बैठते है,
तन्हा रहना किसी को शोभा नहीं देता,
इसलिए रिश्तों का आदर-सम्मान करें,
और उसे खण्डित होने से बचायें…

दीवानेख़ास में मेरे,
दरारें हो गई इतनी,

कि…

अब मैं फूल भी फैंकता हूँ,
तो किनारे टूट जाते है…

#विराज़

About "विराज़"

"Poet"

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