शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस

जिन राहों पर भारी क़दमों से रखता है, हर बचपन अपने क़दमों को,
एक हाथ जो सम्हाल कर, सही मार्ग दिखा कर चलाता है सबको ,
गलतियों पर डांट कर, अच्छाइयों पर ताली बजा प्रोत्साहित करता  है जो,
माता – न पिता होता है, पर उनसे भी बढ़कर भलाई का मार्ग दिखाता है जो,
ऊंचाइयों पर पंहुचा दें, एक ही मकसद होता करता है मार्ग दर्शन  जो ,
अध्यापक हर जीवन में हजरूरी, ये अब क्या समझना  हमको ,
एक ही  दिन उनके सम्मान का हो ऐसा तो जरूरी नहीं,
हर बचपन को सीखना होगा सम्मान करना उनका,
जिस समाज में अपमानित किया जा रहा है उनको ,
जो बनाते है भविष्य राष्ट्र के भावी नवजीवनों का,
अब तो उनके सम्मान के हक की लड़ाई के वास्ते बढ़ना होगा हर किसी को ,

सिर्फ अध्यापक दिवस मना कर ही जिम्मेदारियों से न भागना होगा,
शिक्षक और शिष्य के बीच फिर समन्वय बनाना होगा ॥

One Reply to “शिक्षक दिवस”

  1. Ji mam bilkul shi kaha aapne. Guru or shisy ke vaastvik rishte me vrtmaan me bahut jyaada antr h. Is kmi ko guru or shishy dono ko mil ke door krna hoga. Guru jitna smrpn,tyaag apne shisy ke liye krte hain utna to apne sntaan ke liye ek baar sochte h.
    Is kvita pr mai apne guru Dr. Mahendra giri (HOD- Hindi Dpt. ,S.P.P.G. college.Shohratgarh. Siddharth university

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