बदला सा अक्श

इस दफा आईने में, बदला सा था अक्श मेरा…. न जाने वो कौन सा, जादू था भला, न जाने किस राह, मन ये मेरा था चला, कुछ सुकून ऐसा, मेरे मन को था मिला, आँखों मे चमक, नूर सा चेहरा खिला। आईना था वही, बस बदला सा था अक्श मेरा… इस दफा, जादू किसी का था चला, दुआ किसी की, कबूल कर गया खुदा, नई राह थी, नया था कोई सिलसिला, नूर लेकर यूँ, अक्श फूल सा खिला। इस दफा आईने में, यूँ बदला सा था अक्श मेरा…. धूंध छँट चुकी, इक शख्स था मिला, नूर-ए-खुदा शख्स के चेहरे पे Continue reading बदला सा अक्श