तीन तलाक

तीन तलाक ………………………………………………….. मेरे इस्कूल जाते वक्त तीन तीन घंटे, तेरा मेरे दिदार का तकल्लुफ दिखते ही मेरे, तेरे चेहरे पर रंगत आ जाना मेरे बुर्कानशीं होकर आने पर वो तेरी मुस्कान का बेवा हो जाना मेरे इस्कूल ना जाने कि सूरते हाल में तेरा गली में साइकिल की घंटियां बजाना सुनकर खो गई थी मैं, और तेरी जुस्तजू में दे दिया था मैंने मेरे अपनों की यादों को तलाक कबूल है, कबूल है, कबूल है…… वो जादुई तीन शब्द और तेरा करके मूझे घूंघट से बेपर्दा, करना मुझसे पलकें उठाने की गुजारिश वो मुखङा दिखाने की आरजू-ओ-मिन्नत लेटकर मेरी Continue reading तीन तलाक

सीलन भरी सुबह

सीलन भरी सुबह गंदी सी बिन नहायी, ठंड से ठिठुरती फटे चिथङों में लिपटी कोने में दुबकी बैठी थी वो लड़की…… दो तीन बार कि थी उसने कोशिश अपनी गोद में छुपाये कंकालित अर्धनग्न बिमार भाई की खातिर जाने को सड़क किनारे जलते अलाव के पास लेकिन वहां जाकर भी बारबार लौट आती थी वो उसी हिमधुसरित सीलन भरे ठंडे कौने में क्योंकि उसकी बर्दाश्त के बाहर थी वहां आग तापते लोगों कि आंखों के गर्म नाखूनों की चुभन….. ।। गोलू…… मेरा प्यारा गोलू….. इसी नाम से पुकारती थी वो अपने भाई को जो इस वक्त तप रहा था शीतकालीन Continue reading सीलन भरी सुबह

वक्त की बेवफाई

वक्त की बेवफाई क्या हो गया मेरी आँखों को ? जिन्हें आदत थी मीठे सपनों की, कोई सपने नहीं ठहरते अभी । बह जाते हैं आंसुओं के साथ सभी। जो तस्वीर आँखों में बसी थी कब से ! आज कुछ धुंधलाई है , ये कैसी वक्त ने की बेवफाई है ?