स्मरण

स्मरण फिर भी मुझे, सिर्फ तुम ही रहे हर क्षण में …… मैं कहीं भी तो न था ….! न ही, तुम्हारे संग किसी सिक्त क्षण में, न ही, तुम्हारे रिक्त मन में, न ही, तुम्हारे उजाड़ से सूनेपन में, न ही, तुम्हारे व्यस्त जीवन में, कहीं भी तो न था मैं तुम्हारे तन-बदन में …. स्मरण फिर भी मुझे, सिर्फ तुम ही रहे हर क्षण में …… मैं कहीं भी तो न था ….! न ही, तुम्हारी बदन से आती हवाओं में, न ही, तुम्हारी सदाओं में, न ही, तुम्हारी जुल्फ सी घटाओं में, न ही, तुम्हारी मोहक अदाओं Continue reading स्मरण