परिवेश

ख्वाहिशों में है विशेष, मेरा मनचाहा परिवेश…. जहाँ उड़ते हों, फिजाओं में भ्रमर, उर में उपज आते हों, भाव उमड़कर, बह जाते हों, आँखो से पिघलकर, रोता हो मन, औरों के दु:ख में टूटकर….. सुखद हो हवाएँ, सहज संवेदनशील परिवेश…. ख्वाहिशों में है विशेष, मेरा मनचाहा परिवेश…. जहाँ खुलते हों, प्रगति के अवसर, मन में उपजते हो जहाँ, एक ही स्वर, कूक जाते हों, कोयल के आस्वर, गाता हो मन, औरों के सुख में रहकर…… प्रखर हो दिशाएँ, प्रबुद्ध प्रगतिशील परिवेश…. ख्वाहिशों में है विशेष, मेरा मनचाहा परिवेश…. जहाँ बहती हों, विचार गंगा बनकर, विविध विचारधाराएं, चलती हों मिलकर, रह Continue reading परिवेश