मैं कौन हूं

मैं कौन हूं कभी सरल मुस्कानों सा, पर्वत मालाओं सा दुरूह कभी लगे पुरूस्कार संसर्ग मेरा, तो महाविदग्ध मेरा साथ कभी कभी महासिद्ध तारसप्तक सा, हूं मातृत्व सा लावण्य कभी कभी वेश्या सा वैधव्य लगूं, तो वैदेही सा हूं कारूण्य कभी मैं समय हूं…….. आविर्भूत पराक्रम हूं, कभी अभिभावक मैं लिप्साओं का चिर यौवन मेरी उत्कंठा, तो सम्बोधन कभी मैं चिताओं का अबोधगम्य बेतरतीब कहीं, असंयमी अथाह स्वच्छंद कभी कभी बेलाग बदसूरत हूं, तो सजल साश्वत अनुराग कभी मैं काल हूं…….. मोहपाश मेरा प्रतिभूत, रचता में काल अनुपम अनुप तृणवत सी इक छाया भी, तो कभी ब्रह्मांड मेरा प्रतिरूप लगे अतिलघु Continue reading मैं कौन हूं