आइए आ जाइए

आइए आ जाइए, थोड़ा और करीब आ जाइए…… हँसिए-हँसाइए, रूठीए मनाइए, गाँठ सब खोलकर, जरा सा मुस्कुराइए, गुदगुदाइए जरा खुद को भूल जाइए, भरसक यूँ ही कभी, मन को भी सहलाइए, जीने के ये चंद बहाने सीख जाइए…… आइए आ जाइए, थोड़ा और करीब आ जाइए…… हैं जो अपने, दूर उनसे न जाइए, रिश्तों की महक को यूँ न बिसर जाइए, मन की साँचे में इनको बस ढ़ालिए, जीते जी न कभी, इन रिश्तों को मिटाइए, जीने के ये चंद बहाने सीख जाइए…… आइए आ जाइए, थोड़ा और करीब आ जाइए…… भूल जो हुई, मन में न बिठाइए, खता भूलकर, Continue reading आइए आ जाइए