सरहदी मधुशाला

सरहदी मधुशाला मधुशाला छंद (रुबाई) रख नापाक इरादे उसने, सरहद करदी मधुशाला। रोज करे वो टुच्ची हरकत, नफरत की पी कर हाला। उठो देश के मतवालों तुम, काली बन खप्पर लेके। भर भर पीओ रौद्र रूप में, अरि के शोणित का प्याला।। झूठी ओढ़ शराफत को जब, वह बना शराफतवाला। उजले तन वालों से मिलकर, करने लगा कर्म काला। सुप्त सिंह सा जाग पड़ा तब, वीर सिपाही भारत का। देश प्रेम की छक कर मदिरा, पी कर जो था मतवाला।। जो अभिन्न है भाग देश का, दबा शत्रु ने रख डाला। नाच रही दहशतगर्दों की, अभी जहाँ साकीबाला। नहीं चैन Continue reading सरहदी मधुशाला