शहीद का परिवार

शहीद का परिवार तन्हाई की परछाई को अकेलेपन की सियाही को यादों की पुरवाई को और बीत चूकी छमाही को चलो आज लिखा जाए….. आंखों के बह गये काजल को खामोश हो चूकी पायल को बरस चूके उस बादल को मन मयुर पपिहे घायल को चलो आज लिखा जाए….. बेजान हुई इक नथनी को वक्त काल प्रवाह महाठगनी को धधक खो चूकी अग्नि को कंही शुन्य ताकती सजनी को चलो आज लिखा जाए….. होश खो चुके कंगन को सूख चूके उस चंदन को बूझे दिप के वंदन को सूखी आंखों के क्रंदन को चलो आज लिखा जाए….. रोती, बच्चों की Continue reading शहीद का परिवार